श्रीराम वन गमन एवं सुदामा चरित्र का हुआ मंचन

बक्सर अप टू डेट न्यूज़:रामलीला मंच विजयादशमी महोत्सव के क्रम में ग्यारहवें दिन रामलीला में राम वन गमन व केवट प्रसंग लीला का मंचन किया गया।

जिसमें दिखाया गया कि मंत्री सुमंत जी रथ पर श्री राम, लक्ष्मण और सीता जी को बैठाकर वन को छोड़ने जाते है।वहां उनकी भेंट निषाद राज से होती है।जहाँ निषाद राज प्रभु की भांति भांति से सेवा करते हैं। वहीं पर प्रभु श्री राम निषादराज से बरगद का दूध मंगाते हैं और उसी से अपने अपने बालों की जटा बनाते हैं। यह देखकर मंत्री सुमंत का हृदय दुखित हो जाता है और वह प्रभु से वन में न जाने के लिए विनती करते हैं। श्री राम जी मंत्री को दुखित देख धीरज बंधाते हैं और श्री सीता जी को वन जाने से मना करते हैं।परंतु सीता लौटने से इनकार कर देती है तब प्रभु श्री राम सुमंत को वहां से वापस कर देते हैं। और केवट से नदी पार करने के लिए नाव मांगते हैं। तभी केवट और राम के बीच संवाद होता है।भगवान की स्वीकृति पर केवट श्री राम के चरणों को पकड़ता है और उनके चरणों को धोकर नदी पार कराता है– “अति आनंद उमंग अनुरागा, चरण सरोज पखारन लागा !!

वहीं दूसरी तरफ कृष्ण लीला के दौरान सुदामा चरित्र भाग एक का मंचन किया गया। जिसमें दिखाया गया कि महाराज वासुदेव जी विद्या ग्रहण करने के लिए श्री कृष्ण को गुरु संदीपन जी की पाठशाला में भेजते हैं।मार्ग में उसी पाठशाला में जाते समय सुदामा से मुलाकात होती है। सुदामा के पैर में एक कंटक चुभ जाता है और उनके मुख से प्रभु के नाम की चीख निकलती है. जिसे सुनकर कृष्ण सुदामा के समीप आकर कंटक को पैर से निकालते हैं और वहीं से दोनों में मित्रता हो जाती है।

उक्त लीला को देख दर्शक भाव विभोर हो जाते हैं।
वीरेंद्र कश्यप
चौसा

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