आर्सेनिकोसिस से कैंसर की है संभावना

बक्सर अप टू डेट न्यूज: आर्सेनिकोसिस से कैंसर होने की संभावना बहुत ज्यादा है। आर्सेनिक युक्त जल का लगातार सेवन करने से त्वचा पर छोटे छोटे धब्बे उभरने लगते हैं,जो इसका सम्भाविक संकेत होता है। हथेली और तलवों की त्वचा कठोर, खुरदरी तथा कटी फटी हो जाती है। दिमाग,लीवर, किडनी और फेफड़े की कार्यक्षमता खराब हो जाती है।त्वचा, फेफड़े,यकृत‌और मूत्राशय के कैंसर की संभावना हो सकती है।

अपनी जानकारी को साझा करते हुए इनरेम फाउंडेशन के जिला प्रोगाम पदाधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने यह बातें कहीं। एनजीओ ग्रामीण स्वरोजगार उन्नयन एवं शोध संस्थान रेडरी एवं बक्सर की बात के सचिव सह कर्मयोगी वीरेंद्र कश्यप, पंकज उपाध्याय, रोहित यादव,नीकू ओझा, सिद्धार्थ पांडेय सहित अन्य सदस्यों के साथ विचार एवं सुझाव के दौरान बताया।

उन्होंने बताया कि आर्सेनिक एक गंधहीन और स्वादहीन उपधातु हैं जो जमीन के सतह के नीचे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। आर्सेनिक अपने अकार्बनिक रुप में अत्यधिक विषाक्त है। बक्सर जिला के केशोपुर, मानिकपुर,बिच्छु का डेरा,तौकल राय का डेरा,तिलक राय का डेरा सबसे ज्यादा प्रभावित गांव है।

आर्सेनिक युक्त जल मानव के साथ साथ पशुओं के लिए भी हानिकारक है। अतः इस बिंदु पर भी ध्यान रखना होगा। इससे पशुओं की भी स्वास्थ्य पर खराब प्रभाव पड़ता है। इसके बचाव के लिए पानी का परीक्षण कराना आवश्यक है। आर्सेनिक मुक्त पानी का प्रयोग करना चाहिए। अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां,फल, आंवला, नींबू सहित प्रोटीन युक्त पदार्थ का सेवन करना चाहिए।

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