अल नीनो और कम बारिश का संकट: किसानों के लिए वैज्ञानिकों की विशेष सलाह

बक्सर अप टू डेट न्यूज़:​बिहार में मानसून की 43% कमी और अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए, आईसीएआर (ICAR) के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए मुख्य उपाय जारी किए हैं:

​वैकल्पिक फसलें: धान की जगह कम पानी वाली फसलें जैसे अरहर (किस्में: मालवीय 13, बहार), मक्का (DHM-117) या रागी लगाएं। अरहर के साथ मक्का, उड़द या तिल की मिश्रित खेती करें।
​बीज व रोपाई: बुवाई से पहले बीजों को राइजोबियम या 2% KCl घोल से उपचारित करें। धान की रोपाई के लिए 18-25 दिन के पौधे चुनें और पौधों की दूरी घटाकर 15×15 सेमी रखें।

​जल व नमी प्रबंधन:

खेतों की मेड़ों को 30-35 सेमी ऊँचा करें और जल संचय के लिए छोटा गड्ढा बनाएं। ‘वैकल्पिक गीली-सूखी’ पद्धति या टपक/फव्वारा सिंचाई अपनाएं। नमी रोकने के लिए सूखी घास या पुआल की मल्चिंग करें।

​खाद व छिड़काव:

मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाने के लिए गोबर या केंचुआ खाद डालें। यूरिया को 3-4 किश्तों में दें। सूखे के तनाव से बचाने के लिए पत्तियों पर 2% यूरिया या NPK का छिड़काव करें।

​खरपतवार नियंत्रण:

अंकुरण से पहले पेंडिमेथालिन और 15-20 दिनों बाद बिस्पायरीबैक सोडियम का छिड़काव करें।
​राहत की उम्मीद: मौसम विभाग के अनुसार 18 से 20 जुलाई के बीच राज्य में मध्यम से भारी बारिश और तापमान में 2-4°C की गिरावट की संभावना है।
वीरेंद्र कश्यप
चौसा

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