1925 से चली आ रही ऐतिहासिक रामलीला पर EO की तालाबंदी से लगा विराम,
भड़के ग्रामीणों का जोरदार प्रदर्शन

बक्सर अप टू डेट न्यूज:नगर पंचायत चौसा में करीब एक सदी पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा पर उस वक्त अचानक ग्रहण लग गया, जब कार्यपालक पदाधिकारी (EO) द्वारा की गई तालाबंदी के कारण वर्ष 1925 से निरंतर आयोजित हो रही ऐतिहासिक रामलीला का मंचन रुक गया। दशकों पुरानी परंपरा पर अचानक लगे इस प्रशासनिक ताले से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश फैल गया।
नगर पंचायत कार्यालय में जमकर धरना-प्रदर्शन
रामलीला बंद होने की खबर फैलते ही उप मुख्य पार्षद प्रतिनिधि विकास राज के नेतृत्व में तमाम जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण लामबंद हो गए। आक्रोशित लोगों ने चौसा नगर पंचायत कार्यालय का घेराव कर जोरदार धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि जो मंचन आजादी से पहले से बिना रुके चलता आ रहा था, उसे इस तरह बंद कराना सीधे तौर पर स्थानीय आस्था पर प्रहार है।
प्रशासनिक महकमे में हलचल, वार्ता के बाद मंचन शुरू कराने की पहल
मामले के तूल पकड़ते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में उच्च प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और उग्र ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों को शांत कराने का प्रयास किया। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से सीधी बातचीत की और स्थिति को नियंत्रित करते हुए रामलीला को फिर से सुचारू रूप से शुरू कराने का अनुरोध किया।
आस्था से खिलवाड़ के आरोप, ईओ ने किया खंडन
घटना के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं गर्म हैं। स्थानीय सूत्रों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कार्यपालक पदाधिकारी की मनमानी कार्यशैली से सनातन भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है। दूसरी ओर, ईओ ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए किसी भी गलत मंशा से साफ इनकार किया है।
आरोप-प्रत्यारोप और प्रशासनिक दावों के बीच सच्चाई यह रही कि लगभग सौ साल पुरानी अखंड परंपरा में प्रशासनिक अड़ंगे की वजह से कुछ समय के लिए ही सही, गहरा व्यवधान जरूर पैदा हो गया, जिसे लेकर क्षेत्र में तनाव और चर्चा का माहौल बना हुआ है।







