बक्सर में जनविश्वास की नींव पर सिद्धाश्रम विकास परिषद का आगाज़
बसाव मठिया में बैठक आयोजित

बक्सर अप टू डेट न्यूज़:किसी भी सामाजिक पहल की सफलता नारों और घोषणाओं से नहीं, बल्कि धरातल पर उसकी ईमानदारी और जनभागीदारी से तय होती है। इसी सोच के साथ सिद्धाश्रम विकास परिषद ने समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए हैं। बसाव मठिया प्रांगण में परिषद की दूसरी बैठक राकेश दुबे की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
बैठक की शुरुआत शांति मंत्र के उच्चारण के साथ हुई, जिसके बाद संगठन के गठन के मुख्य उद्देश्यों, भावी कार्यशैली और चरणबद्ध योजनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के प्रमुख आकर्षण एवं निर्णय
कार्यों से बनेगी पहचान: सदस्यों ने सर्वसम्मति से तय किया कि संगठन की पहचान पदाधिकारियों के नामों से नहीं, बल्कि समाज के बीच किए गए स्थायी और उपयोगी कार्यों से होगी।
जनविश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी: परिषद ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता देगी जिनका उद्देश्य केवल औपचारिक आयोजन करना नहीं, बल्कि समाज के लिए दीर्घकालिक परिणाम हासिल करना हो।
सांस्कृतिक चेतना का पुनरुत्थान: बक्सर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और गौरवशाली परंपरा को जनभागीदारी के जरिए आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
सामूहिक सहभागिता पर बल: सामाजिक समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए जागरूक नागरिकों की सक्रिय भूमिका को अनिवार्य बताया गया।
प्रबुद्धजनों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक में अंतरराष्ट्रीय कथावाचक प्रेमाचार्य पितांबर जी महाराज, संजय ओझा, राघव कुमार पाण्डेय (अधिवक्ता), अग्नि कुमार पाण्डेय, गणेश पाण्डेय, आशुतोष चतुर्वेदी, पंकज उपाध्याय, इंद्रजीत चौबे, संजय शास्त्री जी सहित क्षेत्र के कई सदस्य एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
परिषद का यह प्रयास केवल एक संस्था के गठन तक सीमित न होकर समाज को जोड़ने और जनहित के सामूहिक प्रयासों को एक मजबूत मंच प्रदान करने की ओर एक सार्थक कदम है।
वीरेंद्र कश्यप
चौसा







