जिले के तीन पंचायत हुए टीबी मुक्त, 24 मार्च को जिलाधिकारी करेंगे सम्मानित

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ | जिले को 2025 तक टीबी मुक्त करने की दिशा में जिला यक्ष्मा केंद्र प्रयासरत है। जिसके तहत पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने के लिया संचालित टीबी मुक्त पंचायत पहल कार्यक्रम की गति तेज कर दी गई है। कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के सभी प्रखंडों से दो-दो पंचायतों का चयन किया गया था। पिछले एक साल के हुए कार्यों को देखते हुए तीन पंचायतों को टीबी मुक्त बनाया जा चुका है। जिनमें बक्सर सदर प्रखंड के कमरपुर और जासो के साथ चौसा प्रखंड के सरेंजा पंचायत का चयन किया गया है।

जिसकी घोषणा 24 मार्च को विश्व यक्ष्मा दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल करेंगे। साथ ही, जिलाधिकारी इन तीनों पंचायतों के मुखिया को टीबी मुक्त पंचायत का प्रमाण पत्र एवं राष्ट्रीय पिता महात्मा गांधी की कांस्य मूर्ति देकर सम्मानित किया जाएगा। इनके अलावा कार्यक्रम के दौरान बढ़िया काम करने वाले सात अन्य पंचायतों के मुखिया को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। जिनमें सिकरौल, नागपुर, हरपुर, सोवां, नंदन, खेवली और कतीकनार पंचायत शामिल हैं।

तीन साल तक पंचायत के टीबी मुक्त रहने पर दी जाएगी बापू की स्वर्ण प्रतिमा :

जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. शालिग्राम पांडेय ने बताया कि टीबी मुक्त पंचायत कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी मुक्त हो चुके पंचायत को विश्व यक्ष्मा दिवस पर प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा, जो कि अगले एक वर्ष तक मान्य होगा। सम्मान के तौर पर पंचायत को प्रमाण-पत्र और महात्मा गांधी की प्रतिमा देकर सम्मानित किया जाएगा। पहले वर्ष के लिए चयनित पंचाताओं को कांस्य प्रतिमा दी जा रही है। लगातार दो वर्षों तक यह दर्जा बरकरार रहने पर रजत और तीन वर्षों तक यह दर्जा बने रहने पर पंचायतों को गांधी जी की स्वर्ण प्रतिमा दी जाएगी।

आम लोगों और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता भी जरूरी :

डॉ. सुरेश चंद्र सिन्हा, सिविल सर्जन ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें आम लोगों और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता भी जरूरी है। इसकी को देखते हुए ग्राम पंचायतों को भी प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान से जोड़ने के लिए सरकार व स्वास्थ्य विभाग ने अहम कदम उठाया है। इससे पंचायत, प्रखंड और जिला तीनों को ही टीबी मुक्त बनाने की दिशा में ग्राम पंचायतों की सहभागिता रहेगी और इस लक्ष्य को पूरा करने में अहम योगदान भी मिलेगा। उन्होंने बताया कि साथ ही, इस कार्यक्रम से पंचायतों में प्रतिस्पर्धा का माहौल बना है। जो जिले को टीबी मुक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

कार्यक्रम के तहत सरकार ने निर्धारित किए थे इंडिकेटर :

जिला यक्ष्मा केंद्र के डीपीसी कुमार गौरव ने बताया कि टीबी मुक्त पंचायत के लिए सरकार ने कुछ इंडिकेटर निर्धारित किए हैं। जिनमें कार्यक्रम के तहत चयनित पंचायतों में एक हजार जनसंख्या पर एक या एक से कम मरीज होने चाहिए। इसी तरह उस इलाके में एक हजार लोगों में कम से कम 30 लोगों की बलगम जांच अनिवार्य है। एक वर्ष तक 85 फीसदी ट्रिटमेंट सेक्सस रेट होना चाहिए। साथ ही, डीबीटी के तहत पहली निक्षय पोषण का लाभ लेना जरूरी है। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मरीजों को पोषण कीट दी गई हो। यूनिवर्सल ड्रग्स सेंसिटिविटी टेस्ट भी अनिवार्य है। इन इंडिकेटर्स को पूरा करने वाले पंचायतों को 2023 के लिए एक साल के टीबी मुक्त ग्राम पंचायत का सर्टिफिकेट दिया जा रहा है।

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