ऋग्वेद की ब्रह्मवादिनी परंपरा को सहेज रहीं बक्सर की तीन बेटियां

दिल्ली में कर रहीं संस्कृत की साधना

​बक्सर अप टू डेट न्यूज़:महर्षि विश्वामित्र की पावन भूमि बक्सर की तीन सगी बहनों ने देश की राजधानी दिल्ली में देववाणी संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने का अनूठा संकल्प लिया है। ऋग्वेद काल की विदुषी नारियों—घोषा, अपाला और गार्गी—की परंपरा को जीवंत करते हुए ये बेटियां दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के प्रतिष्ठित कॉलेजों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।

​तीनों बहनों का परिचय और उपलब्धियां:

​बक्सर के सिविल लाइंस निवासी अधिवक्ता विनोद उपाध्याय और माता रेखा देवी की ये तीनों पुत्रियां शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं:
​सौम्या उपाध्याय (बड़ी बहन): डीयू के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस से संस्कृत स्नातक की छात्रा हैं। बक्सर के सरस्वती विद्या मंदिर से 93% अंकों के साथ 10वीं उत्तीर्ण करने वाली सौम्या को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रवृत्ति भी मिली है। वे शास्त्रार्थ और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में निरंतर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।
​तनया उपाध्याय (मंझली बहन): डीयू के इंद्रप्रस्थ कॉलेज में संस्कृत स्नातक की छात्रा हैं। इन्होंने भी 10वीं में 94% अंक प्राप्त किए थे। तनया भविष्य में वैदिक विदुषियों की तरह भारतीय ज्ञान-संस्कृति की संवाहक बनना चाहती हैं।
​अपूर्वा उपाध्याय (छोटी बहन): डीयू के लक्ष्मीबाई कॉलेज में समाज विज्ञान की छात्रा हैं। विषय अलग होने के बावजूद भारतीय संस्कृति और सनातन ज्ञान परंपरा में इनकी गहरी रुचि है।

​संस्कार और विद्वता की नींव

​डुमरांव अनुमंडल के एकौनी गांव के स्वर्गीय अधिवक्ता सिद्धेश्वर उपाध्याय की पौत्रियां शिक्षा की इस राह पर कई आर्थिक चुनौतियों को पार कर आगे बढ़ी हैं। पिता विनोद उपाध्याय का मानना है कि “धन से बड़ी विरासत शिक्षा होती है।” वहीं, बेटियों को देववाणी की ओर प्रेरित करने में उनके मामा (गोविंदजी दुबे, गोपाल कृष्ण दुबे और सत्यम दुबे), जो स्वयं संस्कृत के विद्वान हैं, का अमूल्य योगदान रहा है।

​भविष्य का संकल्प

​ऐसे समय में जब संस्कृत का अध्ययन करने वाले युवाओं की संख्या घट रही है, इन तीनों बहनों का लक्ष्य संस्कृत में उच्च शोध (Research), अध्यापन और भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण में योगदान देना है। छोटे शहर से निकलकर देश के शीर्ष विश्वविद्यालय में अपनी मेधा का परचम लहराने वाली बक्सर की ये बेटियां समाज के लिए प्रेरणा की एक नई किरण बनकर उभरी हैं।
वीरेंद्र कश्यप
चौसा

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