तिलकुट की सोंधी खुशबू से सराबोर हुआ बक्सर जिला

गया के कारीगरों की धमक, बढ़ी मांग
बक्सर के रामरेखा घाट रोड, मुख्य बाजार, ज्योति चौक और स्टेशन रोड जैसे इलाकों में तिलकुट कूटने की आवाजें सुनाई देने लगी हैं। स्थानीय दुकानदारों ने विशेष रूप से कुशल कारीगरों को बुलाया है। तिलकुट की वैरायटी में इस बार भी ‘खोवा तिलकुट’ और ‘गुड़ तिलकुट’ की सबसे ज्यादा मांग है।
बाजार में उपलब्ध खास वैरायटी:
बाजार में इस बार स्वाद और सेहत का संगम देखने को मिल रहा है:
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चीनी तिलकुट: सफेद और कुरकुरा, जो बच्चों और युवाओं की पहली पसंद है।
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गुड़ तिलकुट: सेहत के प्रति जागरूक लोगों और बुजुर्गों के लिए विशेष आकर्षण।
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तिलवा और लाई: रामदाना, चूड़ा और मुरमुरे (लाई) के लड्डू भी बाजारों की रौनक बढ़ा रहे हैं।
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विशेष खोवा तिलकुट: खास आर्डर पर तैयार किया जाने वाला सॉफ्ट तिलकुट।
“पिछले साल की तुलना में इस बार तिल और गुड़ की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हुई है, लेकिन लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं है। हम शुद्धता का पूरा ख्याल रख रहे हैं।”
दही-चूड़ा के संगम की तैयारी
मकर संक्रांति का मतलब ही है दही-चूड़ा और तिलकुट का मेल। बाजार में तिलकुट के साथ-साथ चूड़ा (कतरनी) और गुड़ की भी आवक बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों से किसान ताज़ा चूड़ा लेकर बाजार पहुँच रहे हैं। वहीं, डेयरियों और स्थानीय ग्वालों ने भी दही की भारी मांग को देखते हुए विशेष तैयारी शुरू कर दी है।
बक्सर में पर्व का महत्व
धार्मिक दृष्टिकोण से भी बक्सर में मकर संक्रांति बेहद खास होती है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य से विशेष फल मिलता है। प्रशासन भी रामरेखा घाट और अन्य गंगा घाटों पर उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने में जुट गया है।







