खीरी में महान विभूतियों को ग्रामीणों ने की नमन

बक्सर अप टू डेट न्यूज़:राजपुर प्रखंड के खीरी गांव में स्व. तुलसी चौबे की 116वीं जयंती एवं स्व. ललन चौबे की 35वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई।बक्सर जिले के राजपुर प्रखंड अंतर्गत खीरी गांव में राष्ट्रभक्ति, त्याग और सामाजिक समर्पण के प्रतीक दो महान विभूतियों , स्वतंत्रता सेनानी तुलसी चौबे की 116वीं जयंती तथा भारतीय जनता पार्टी (बक्सर) के प्रथम जिला अध्यक्ष ललन चौबे की 35वीं पुण्यतिथि—श्रद्धा, सम्मान और गरिमामय वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं युवाओं की सहभागिता रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ दोनों महापुरुषों के चित्र पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि स्व. तुलसी चौबे स्वतंत्रता संग्राम के निर्भीक और कर्मठ सेनानी थे। उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए कई बार जेल यात्राएं कीं, किंतु उनके संकल्प और राष्ट्रप्रेम में कभी कमी नहीं आई। उनका जीवन त्याग, तपस्या और निस्वार्थ सेवा का अद्वितीय उदाहरण रहा। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी वे समाज के कमजोर वर्गों, किसानों और वंचितों के हितों के लिए निरंतर सक्रिय रहे। वे जनसमस्याओं को न्यायालयों और प्रशासनिक मंचों पर मजबूती से रखते थे और आम लोगों को न्याय दिलाने के लिए सतत प्रयासरत रहते थे।
ग्रामीण सांस्कृतिक जीवन को सशक्त बनाने में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। अपने गांव में रामलीला मंचन को प्रोत्साहित कर उन्होंने सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत किया। वे प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें राष्ट्रहित में प्रेरित करने की अनोखी क्षमता रखते थे। वक्ताओं ने कहा कि स्व. तुलसी चौबे का संपूर्ण जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है और उनके आदर्शों का अनुसरण करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस अवसर पर स्व. ललन चौबे को संगठन, सिद्धांत और संघर्ष की राजनीति का प्रतीक बताया गया। भाजपा (बक्सर) के प्रथम जिला अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को मजबूत आधार प्रदान किया और कार्यकर्ताओं को एकजुट कर पार्टी को नई दिशा दी। वक्ताओं ने कहा कि वे 1974 के ऐतिहासिक जेपी आंदोलन से जुड़े रहे और जनहित के आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। सार्वजनिक जीवन में उनकी सादगी, स्पष्टवादिता और ईमानदारी सर्वविदित थी।
मुखिया (खीरी) एवं राजपुर के उपप्रमुख के रूप में स्व. ललन चौबे ने क्षेत्र के विकास, पारदर्शी प्रशासन और जनसमस्याओं के समाधान के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए। उन्होंने पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को गति देने और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भाजपा की विभिन्न समितियों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने संगठनात्मक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर अपना पूरा जीवन समाज और राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया।
कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी कामेश्वर चौबे, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी सह भाजपा नेता अभिषेक कुमार चौबे, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी घनश्याम चौबे, राधेश्याम दुबे, शिव शंकर दुबे, जिला परिषद के पूर्व प्रतिनिधि सत्येंद्र चौबे, सरपंच जोगिंदर चौहान, जयशंकर दुबे, कलेंडर त्रिगुण, तुलसी पासवान, गुड्डू त्रिगुण, झबू त्रिगुण, विजय चौबे, विकास चौबे, प्रभावती देवी, गीता देवी, पुष्प लता देवी, वंदना सोनी, पीहू, शीशपाल चौहान, जंग बहादुर ठाकुर, अखिलेश सेठ, धीरज सेठ, दिनेश चौबे, राहुल सेठ, भैरू ठाकुर, श्रीनिवास लाल, राधे कृष्ण दुबे, कामेश्वर नाथ चौबे, अशोक सेठ, राजा सेठ, बिट्टू तिवारी सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
समारोह के अंत में उपस्थित जनों ने दोनों महान विभूतियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे राष्ट्रसेवियों की कर्मगाथा आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।
वीरेंद्र कश्यप
चौसा







