भक्त की पुकार पर ही धरा पर अवतरित होते हैं करुणा सिंधु: अशोक मिश्र

श्रीमती उषा सिन्हा के सौजन्य से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्री कृष्ण और श्री राम के अवतार की महिमा का हुआ वर्णन
स्थानीय क्षेत्र में श्रीमती उषा सिन्हा के सौजन्य से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालु भक्ति के सागर में गोते लगाते नजर आए। कथा के मुख्य प्रसंग में भगवान श्री कृष्ण और श्री राम के अवतार की कथा का विस्तार से वर्णन किया गया।
अवतार के दो मुख्य प्रयोजन
कथावाचक अशोक मिश्र (शिष्य: पूज्य मामाजी महाराज) ने मामाजी की प्रसिद्ध ग्रंथावली और भजनों के माध्यम से भक्तों को निहाल किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर के अवतार के दो मुख्य कारण होते हैं: जब पृथ्वी पर असुरों का अत्याचार बढ़ता है और सज्जन दुखी होते हैं।जब भक्त का प्रेम पराकाष्ठा पर होता है और वह हृदय से प्रभु को पुकारता है।
कथावाचक ने स्पष्ट किया कि असुरों का संहार तो प्रभु की इच्छा मात्र से हो सकता है, लेकिन धरा पर उनका साक्षात् आगमन केवल “प्रेमी की पुकार” और अनोखे प्यार के कारण ही होता है।
मनु-शतरूपा का तप और राम का प्राकट्य
कथा के दौरान मनु जी के वैराग्य का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जब मनु जी को बोध हुआ कि जीवन का अंतिम पड़ाव आ गया और हरि भक्ति के बिना जन्म व्यर्थ जा रहा है, तब उन्होंने पुत्र को राज सौंपकर वन में कठिन तपस्या की। यही तपस्या फलीभूत हुई और वे अगले जन्म में दशरथ-कौशल्या के रूप में अवधपुरी में प्रकट हुए, जिनके आँगन में स्वयं नारायण ने पुत्र रूप में जन्म लिया।
श्रीराम: मानव जाति का संविधान
अशोक मिश्र जी ने जोर देते हुए कहा कि ”श्रीराम केवल एक अवतार नहीं, बल्कि मानव जाति के आदर्श हैं और उनका जीवन इस सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ संविधान है।” उन्होंने बताया कि श्रीराम ने छलरहित जीवन का उदाहरण पेश किया। वे माता-पिता, भाई-बहन और मित्रों के लिए तो आदर्श थे ही, साथ ही उन्होंने शबरी, निषादराज, वानर-भालू और कोल-भील जैसे वंचित समाज को गले लगाकर सामाजिक समरसता का अनूठा संदेश दिया।
कथा के अंत में महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लेकर पुण्य लाभ कमाया।







