देवता भी भारत में सशरीर आना चाहते हैं -उमेश भाई ओझा

बक्सर अप टू डेट न्यूज़:स्वर्ग के देवता भी मानव शरीर प्राप्त कर भारतवर्ष में आना चाहते हैं।

प्रगटे हैं कुंवर कन्हाई, सखि बजत बधाई।
पूज्य संत ब्रह्मलीन श्रीरामचरितदास जी स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आज उमेश भाई ओझा के मुखारविंद से भागवत जी में विविध कथाओं का गान किया गया। हजारों श्रोताओं के मध्य कथा कहते हुए भागवत को विरक्त का अधिकारी बताया। विरक्त, वैष्णव, निस्पृह, एवं निर्लोभी हो, वही भागवत कथा कहने का अधिकारी हो सकता है। स्वर्ग के देवता भी मानव शरीर प्राप्त कर भारतवर्ष में आना चाहते हैं। भगवान की कथा रूपी अमृत जहाँ बरस रही वहाँ देवता, गंधर्व, मनु, नाग सभी रहना चाहते हैं। संत के लक्षण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि –
​”कहहि सत्य प्रिय वचन विचारी। जागत सोअत शरण तिहारी॥”
“तुम्ही छाड़ि गति दूसर नाहीं। राम बसहिं तिन्हके मन माही॥”
​गंगा मैया के प्रकट होने की कथा प्रसंग को श्री शुकदेव मुनि ने परीक्षित जी को सुनाया। गंगा संसार के लोगों की पाप धोती है और गंगा के पाप को संत, ऋषि, मुनि, वैरागी आदि धोया करते हैं।​”गंगा गंगा यो ब्रूयात योजनानां शतैरपि। मुच्यते सर्वपापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति।”
​विद्यापति जी ने गंगा मैया से प्रार्थना करते हुए – “बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे, छोड़त नयन निरत बह नीरे॥”

​भगवान श्रीराम का अवतार सूर्यवंश में हुआ था त्रेतायुग में जबकि द्वापर युग में यही प्रभु यदुवंश में माँ देवकी एवं वसुदेव बाबा के घर अवतरित हुए थे। कंस के कारागार मथुरा में हमारे हरि प्रकट हुए। आठवी संतान के रूप में पालन पोषण यशोदा माँ एवं नंद बाबा के घर एवं बाललीला भी वही हुई। पूज्य गुरुदेव अनन्त श्री विभूषित द्वारा रचित पद के माध्यम से – प्रगटे हैं कुंवर कन्हाई, सखि बजत बधाई।
​हो नन्द द्वारे बधैया बाजे। यशोदा जायो ललना मैं वेदन में सुन आई।
कुंज में ह्वै रही जयजयकार, नन्द घर लाला जायो है।
​इत्यादि सुंदर बधाई के पदों को गाकर भाव विभोर कर दिये। भगवान श्रीकृष्ण ने अनेक बाललीलाएं की। षष्ठी की रात पूतना राक्षसी का उद्धार किया। माखन चोरी तो आम बात थी।

यह रहस्यात्मक तथ्य है भगवान माखन चोरी की लीला कर सभी गोप-ग्वालों का मन चुराना चाहते थे। उखल बंधन की लीला में प्रभु ने संकेत में ऐश्वर्य दिखा दिया। ऐश्वर्य प्रभु का तब छुप जाता है जब किसी प्रेमी के प्रेम की डोरी में बंध जाते हैं। यथा – “बंध गया मैं न जानूँ ये कैसी है मित्र ऐसी है ये प्रेम डोरी।

संध्या भजन कार्यक्रम में गुड्डू पाठक, विकास तिवारी, कमलेश कुँवर, उमेश जायसवाल इत्यादि ने अपनी प्रस्तुति दी।कार्यक्रम में गोपाल चतुर्वेदी, सीताराम चतुर्वेदी, जयशंकर तिवारी, श्यामजी, बिहारी जी, रवि, मनोज उपस्थित रहे।

नीतीश सिंह
8538987562

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